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उद्धव ठाकरे की शिवसेना में दरार या सियासी ड्रामा? मातोश्री मीटिंग के बाद सांसदों पर सवाल

उद्धव ठाकरे की शिवसेना में टूट की अटकलें तेज हैं। मातोश्री बैठक के बाद 9 सांसदों की एकजुटता पर सवाल उठे, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी हलचल बढ़ गई है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में पहुंचती नजर आ रही है, जहां शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के भीतर टूट और असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपने सांसदों को एकजुट रखना बन गई है। हाल ही में मुंबई स्थित उनके आवास ‘मातोश्री’ में हुई एक अहम बैठक ने सियासी माहौल को और गरमा दिया। इस बैठक में कुल 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 4 सांसद ही मौजूद रहे, जबकि बाकी 5 सांसदों की गैरमौजूदगी ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए।

रिपोर्ट्स में कई दावे

बैठक में अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल शामिल हुए। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि बाकी पांच सांसद ऑनलाइन जुड़े थे, लेकिन बाद में सामने आई रिपोर्ट्स ने इस दावे पर भी सवाल खड़े कर दिए। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ सांसदों से सीधी बातचीत भी नहीं हो पाई।

ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा से बढ़ी हलचल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम की चर्चा तेज हो गई है। शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसद संपर्क में हैं और जल्द ही बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे खेमे के कुछ नेताओं ने दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों से मुलाकात भी की है, जिससे अटकलों को और बल मिला है।

शिंदे गुट के दावे और बढ़ता सियासी तनाव

शिंदे गुट से जुड़े नेताओं का दावा है कि उद्धव ठाकरे गुट के कम से कम 6 से 7 सांसद पार्टी छोड़कर उनके साथ आ सकते हैं। दलबदल कानून के तहत यदि दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होते हैं, तो यह कानूनी रूप से वैध माना जाएगा, जिससे पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है। कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि कई सांसदों की नाराजगी पार्टी नेतृत्व से बढ़ती जा रही है और अंदरूनी बातचीत अंतिम चरण में है।

उद्धव ठाकरे का डैमेज कंट्रोल

स्थिति बिगड़ती देख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे सक्रिय हो गए हैं। दोनों नेता असंतुष्ट सांसदों से सीधे संवाद कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह टूट को रोका जा सके। पार्टी का दावा है कि सभी सांसद उनके साथ मजबूती से खड़े हैं, लेकिन मौजूदा हालात और बैठकों से बने सस्पेंस ने इस दावे पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।

सियासी भविष्य पर टिकी निगाहें

फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसद तीन अलग-अलग धाराओं में बंटे हुए नजर आ रहे हैं एक समूह खुलकर साथ दिख रहा है, दूसरा वर्चुअल मौजूदगी का दावा कर रहा है, जबकि तीसरे को लेकर पूरी तरह सस्पेंस बना हुआ है। आने वाले दिनों में मॉनसून सत्र से पहले अगर कोई बड़ा बदलाव होता है, तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा भूचाल आ सकता है। इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को एकजुट रख पाएंगे या फिर एक और बड़ा सियासी ‘टूट एपिसोड’ सामने आएगा?

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